महादेवी वर्मा द्वारा रचित बचपन की स्मृतियाँ, सांप्रदायिक सद्भाव और स्त्री-शिक्षा का वर्णन
'मेरे बचपन के दिन' महादेवी वर्मा द्वारा लिखित एक संस्मरण (Memoir) है। इसमें लेखिका ने अपने बचपन के अनुभवों, शिक्षा, छात्रावास (Hostel) के जीवन, और उस समय की सामाजिक परिस्थितियों का सजीव चित्रण किया है। यह पाठ हमें उस दौर की हिंदू-मुस्लिम एकता और लड़कियों की स्थिति के बारे में बताता है।
उस समय समाज में लड़कियों को बोझ समझा जाता था और पैदा होते ही उन्हें मार दिया जाता था (परमधाम भेज दिया जाता था)। लेकिन महादेवी के परिवार में स्थिति अलग थी। उनके बाबा ने दुर्गा पूजा की थी और वे घर में 200 वर्षों के बाद पैदा होने वाली पहली लड़की थीं, इसलिए उनका बहुत स्वागत-सत्कार हुआ।
पाँचवीं कक्षा में महादेवी का दाखिला क्रॉसवेथ गर्ल्स कॉलेज में हुआ। वहाँ का वातावरण बहुत अच्छा था। अलग-अलग धर्मों और स्थानों की लड़कियाँ एक साथ रहती थीं। वहाँ एक ही मेस में खाना बनता था और कोई भेदभाव नहीं था।
हॉस्टल में महादेवी की मुलाकात सुभद्रा कुमारी चौहान
(जो उनसे 2 साल बड़ी थीं) से हुई।
• महादेवी छिपकर कविताएँ लिखती थीं।
• सुभद्रा जी ने एक दिन उनकी छिपाई हुई कविताएँ ढूँढ लीं और पूरे
हॉस्टल में बता दिया।
• इसके बाद दोनों में गहरी मित्रता हो गई और वे साथ में 'खड़ी बोली'
में कविताएँ लिखने लगीं।
कवि सम्मेलनों में कविता पाठ करने पर महादेवी जी को एक चाँदी का नक्काशीदार कटोरा पुरस्कार में मिला। जब महात्मा गांधी आनंद भवन आए, तो महादेवी उन्हें अपना कटोरा दिखाने गईं। गांधीजी ने देश सेवा (सत्याग्रह) के लिए वह कटोरा उनसे मांग लिया। महादेवी ने खुशी-खुशी वह कटोरा दे दिया।
महादेवी के पड़ोस में 'जवारा के नवाब' रहते थे। उनके संबंधों में
इतनी आत्मीयता थी कि महादेवी उन्हें 'ताई' कहती थीं। वे लोग हिंदी
बोलते थे।
• रक्षाबंधन पर महादेवी नवाब साहब के बच्चों को राखी बांधती थीं।
• मुहर्रम में उनके लिए हरे कपड़े बनते थे।
• यह उस समय के गहरे हिंदू-मुस्लिम प्रेम को दर्शाता है।
| महादेवी का बचपन (अतीत) | आज का समय (वर्तमान) |
|---|---|
| हिंदू-मुस्लिम एक परिवार की तरह रहते थे। | सांप्रदायिकता और भेदभाव बढ़ गया है। |
| भाषा (हिंदी/उर्दू) लोगों को जोड़ती थी। | भाषा को लेकर विवाद होते हैं। |
| लड़कियों की शिक्षा के लिए संघर्ष था। | अब शिक्षा सुलभ है, पर सुरक्षा की चिंता है। |
लेखिका मानती हैं कि अगर आज भी वह सांप्रदायिक सद्भाव (Harmony) होता जो उनके बचपन में था, तो भारत का नक्शा कुछ और ही होता। वह अपनापन आज के समाज में एक सपने जैसा लगता है।
प्रश्न: लेखिका ने अपनी माँ के व्यक्तित्व की किन
विशेषताओं का उल्लेख किया है?
उत्तर:
1. वे धार्मिक स्वभाव की थीं और पूजा-पाठ करती थीं।
2. उन्हें हिंदी और संस्कृत का ज्ञान था।
3. उन्होंने ही महादेवी को पहली बार 'पंचतंत्र' पढ़ना सिखाया और
साहित्य की ओर प्रेरित किया।
प्रश्न: जवारा के नवाब के साथ अपने पारिवारिक
संबंधों को लेखिका ने आज के संदर्भ में स्वप्न जैसा क्यों कहा है?
उत्तर: क्योंकि उस समय हिंदू और मुस्लिम धर्म का भेद
भूलाकर प्रेम से रहते थे। वे एक-दूसरे के त्योहार मनाते थे और सुख-दुख
के साथी थे। आज के समय में सांप्रदायिकता के कारण ऐसा निस्वार्थ प्रेम
दिखाई नहीं देता, इसलिए यह अब एक सपने जैसा लगता है।
• परमधाम: स्वर्ग (यहाँ अर्थ है मार देना)
• विदुषी: विद्वान महिला (Scholar)
• निराहार: बिना कुछ खाए-पिए
• सांप्रदायिकता: धर्म के आधार पर भेदभाव
• तकाजा: मांग/आवश्यकता