🔥 नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया

चपला देवी द्वारा रचित 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की एक ऐतिहासिक त्रासदी

1. लेखिका परिचय एवं पाठ का सार

📖 परिचय (Introduction)

यह पाठ चपला देवी द्वारा लिखित एक रिपोर्ताज (Reportage) शैली की रचना है। यह सन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के समय की एक सच्ची घटना पर आधारित है। इसमें नाना साहब की पुत्री 'मैना' के बलिदान और अंग्रेजों की क्रूरता का मार्मिक वर्णन किया गया है।

🌟 ऐतिहासिक संदर्भ

कानपुर में 1857 की क्रांति के असफल होने के बाद, विद्रोही नेता नाना साहब को भागना पड़ा। वे जल्दबाजी में अपनी पुत्री मैना को साथ नहीं ले जा सके। मैना बिठूर के महल में अकेली रह गई, जिसे बाद में अंग्रेजों ने जला दिया।

🔑 मुख्य पात्र (Key Characters)

  • मैना: नाना साहब की निडर और साहसी पुत्री।
  • जनरल हे (General Hay): एक अंग्रेज अधिकारी जो मैना से सहानुभूति रखता था।
  • सर टॉमस हे (General Outram): क्रूर अंग्रेज सेनापति जिसने महल तोड़ने का आदेश दिया।
  • लॉर्ड कैनिंग: तत्कालीन गवर्नर जनरल।

2. घटनाक्रम: बिठूर का विध्वंस

2.1 मैना और जनरल 'हे' का संवाद

⚡ मैना का तर्क

जब अंग्रेज सेना तोपों से नाना साहब के महल को उड़ाने आई, तो मैना बरामदे में आकर खड़ी हो गई। उसने जनरल 'हे' से तर्क किया:

"अंग्रेजों का गुस्सा नाना साहब पर है, इस जड़ पदार्थ (महल) ने क्या अपराध किया है? आप इसे क्यों तोड़ना चाहते हैं?"

💡 जनरल 'हे' की सहानुभूति

जनरल 'हे' मैना को पहचान गया क्योंकि उसकी अपनी बेटी 'मेरी' (Mary) और मैना बचपन की सहेलियाँ थीं। जनरल 'हे' के मन में मैना के प्रति दया थी, लेकिन वे सरकारी आदेश के आगे विवश थे। उन्होंने महल बचाने का प्रयास करने का वचन दिया, लेकिन सफल नहीं हो सके।

2.2 जनरल आउटरम की क्रूरता

जनरल 'हे' के जाने के बाद जनरल आउटरम वहां आया। वह बहुत क्रोधी था। उसने जनरल 'हे' की सिफारिश को ठुकरा दिया और तोपों से महल को उड़ा दिया। मैना किसी तरह वहाँ से बच निकली।

3. मैना का बलिदान

📖 गिरफ्तारी और अंतिम इच्छा

बाद में मैना को एक खंडहर से गिरफ्तार किया गया। उसे जनरल आउटरम के सामने लाया गया। मैना ने अपनी अंतिम इच्छा व्यक्त की:
"मुझे इस खंडहर पर बैठकर थोड़ी देर रो लेने दीजिए।"
परंतु पत्थर-दिल अंग्रेजों ने उसकी यह इच्छा भी पूरी नहीं की।

🔑 अग्निदाह (The Execution)

  • मैना को कानपुर के किले में लाया गया।
  • वहाँ उसे भीषण अग्नि में जलाकर भस्म कर दिया गया।
  • मैना ने हंसते-हंसते मृत्यु को गले लगाया।
  • इस दृश्य को देखने वालों का हृदय भी कांप उठा।

4. अंग्रेज अधिकारियों का तुलनात्मक अध्ययन

विशेषता जनरल 'हे' (General Hay) जनरल आउटरम (General Outram)
स्वभाव दयालु और मानवीय संवेदना वाला। अत्यंत क्रूर और निर्दयी।
मैना के प्रति दृष्टिकोण मैना को अपनी पुत्री की सहेली मानता था। मैना को केवल एक बागी (Rebel) की बेटी मानता था।
कार्य महल को बचाने की कोशिश की। महल को तोपों से उड़ा दिया।
परिणाम वह असफल रहा क्योंकि आदेश ऊपर से था। उसने क्रूरतापूर्वक आदेश का पालन किया।

5. पाठ का उद्देश्य और संदेश

🌟 बलिदान की अमर कहानी

यह पाठ हमें बताता है कि आजादी की लड़ाई में केवल पुरुषों ने ही नहीं, बल्कि महिलाओं और बच्चों ने भी बलिदान दिया है। मैना का त्याग भारतीय इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ गया।

⚡ क्रूरता बनाम मानवता

लेखिका ने अंग्रेजों की बर्बरता को उजागर किया है। एक छोटी बालिका, जिसने कोई अपराध नहीं किया था, उसे केवल इसलिए जला दिया गया क्योंकि वह एक क्रांतिकारी की बेटी थी। यह घटना ब्रिटिश शासन के अमानवीय चेहरे को दिखाती है।

6. अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)

💡 प्रश्न 1

प्रश्न: बालिका मैना ने सेनापति 'हे' को कौन-कौन से तर्क देकर महल की रक्षा के लिए प्रेरित किया?

उत्तर:
1. उसने कहा कि यह महल एक जड़ पदार्थ (बेजान चीज़) है, इसने अंग्रेजों का क्या बिगाड़ा है?
2. उसने जनरल 'हे' को याद दिलाया कि उनकी पुत्री 'मेरी' मैना की सहेली थी और जनरल स्वयं अक्सर उस महल में आते थे।
3. उसने वात्सल्य भाव जगाकर महल बचाने की प्रार्थना की।

💡 प्रश्न 2

प्रश्न: मैना जड़ पदार्थ मकान को क्यों बचाना चाहती थी?

उत्तर: वह महल मैना का पैतृक निवास था। उसकी बचपन की यादें उससे जुड़ी थीं। हर व्यक्ति को अपनी जन्मभूमि और घर से प्रेम होता है, इसलिए मैना उस 'जड़ पदार्थ' को अपनी भावनाओं के कारण बचाना चाहती थी।

📝 कठिन शब्दार्थ (Glossary)

भस्म: जलकर राख हो जाना
जड़ पदार्थ: निर्जीव वस्तु (Inanimate object)
पाषाण-हृदय: पत्थर दिल/निर्दयी
निरपराध: जिसने कोई अपराध न किया हो
अवशिष्ट: बचा हुआ (Remains)