चपला देवी द्वारा रचित 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की एक ऐतिहासिक त्रासदी
यह पाठ चपला देवी द्वारा लिखित एक रिपोर्ताज (Reportage) शैली की रचना है। यह सन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के समय की एक सच्ची घटना पर आधारित है। इसमें नाना साहब की पुत्री 'मैना' के बलिदान और अंग्रेजों की क्रूरता का मार्मिक वर्णन किया गया है।
कानपुर में 1857 की क्रांति के असफल होने के बाद, विद्रोही नेता नाना साहब को भागना पड़ा। वे जल्दबाजी में अपनी पुत्री मैना को साथ नहीं ले जा सके। मैना बिठूर के महल में अकेली रह गई, जिसे बाद में अंग्रेजों ने जला दिया।
जब अंग्रेज सेना तोपों से नाना साहब के महल को उड़ाने आई, तो मैना बरामदे में आकर खड़ी हो गई। उसने जनरल 'हे' से तर्क किया:
"अंग्रेजों का गुस्सा नाना साहब पर है, इस जड़ पदार्थ (महल) ने क्या अपराध किया है? आप इसे क्यों तोड़ना चाहते हैं?"
जनरल 'हे' मैना को पहचान गया क्योंकि उसकी अपनी बेटी 'मेरी' (Mary) और मैना बचपन की सहेलियाँ थीं। जनरल 'हे' के मन में मैना के प्रति दया थी, लेकिन वे सरकारी आदेश के आगे विवश थे। उन्होंने महल बचाने का प्रयास करने का वचन दिया, लेकिन सफल नहीं हो सके।
जनरल 'हे' के जाने के बाद जनरल आउटरम वहां आया। वह बहुत क्रोधी था। उसने जनरल 'हे' की सिफारिश को ठुकरा दिया और तोपों से महल को उड़ा दिया। मैना किसी तरह वहाँ से बच निकली।
बाद में मैना को एक खंडहर से गिरफ्तार किया गया। उसे जनरल आउटरम के सामने लाया गया। मैना ने अपनी अंतिम इच्छा व्यक्त की:
"मुझे इस खंडहर पर बैठकर थोड़ी देर रो लेने दीजिए।"
परंतु पत्थर-दिल अंग्रेजों ने उसकी यह इच्छा भी पूरी नहीं की।
| विशेषता | जनरल 'हे' (General Hay) | जनरल आउटरम (General Outram) |
|---|---|---|
| स्वभाव | दयालु और मानवीय संवेदना वाला। | अत्यंत क्रूर और निर्दयी। |
| मैना के प्रति दृष्टिकोण | मैना को अपनी पुत्री की सहेली मानता था। | मैना को केवल एक बागी (Rebel) की बेटी मानता था। |
| कार्य | महल को बचाने की कोशिश की। | महल को तोपों से उड़ा दिया। |
| परिणाम | वह असफल रहा क्योंकि आदेश ऊपर से था। | उसने क्रूरतापूर्वक आदेश का पालन किया। |
यह पाठ हमें बताता है कि आजादी की लड़ाई में केवल पुरुषों ने ही नहीं, बल्कि महिलाओं और बच्चों ने भी बलिदान दिया है। मैना का त्याग भारतीय इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ गया।
लेखिका ने अंग्रेजों की बर्बरता को उजागर किया है। एक छोटी बालिका, जिसने कोई अपराध नहीं किया था, उसे केवल इसलिए जला दिया गया क्योंकि वह एक क्रांतिकारी की बेटी थी। यह घटना ब्रिटिश शासन के अमानवीय चेहरे को दिखाती है।
प्रश्न: बालिका मैना ने सेनापति 'हे' को कौन-कौन से तर्क देकर महल की रक्षा के लिए प्रेरित किया?
उत्तर:
1. उसने कहा कि यह महल एक जड़ पदार्थ (बेजान चीज़) है, इसने अंग्रेजों का क्या बिगाड़ा है?
2. उसने जनरल 'हे' को याद दिलाया कि उनकी पुत्री 'मेरी' मैना की सहेली थी और जनरल स्वयं अक्सर उस महल में आते थे।
3. उसने वात्सल्य भाव जगाकर महल बचाने की प्रार्थना की।
प्रश्न: मैना जड़ पदार्थ मकान को क्यों बचाना चाहती थी?
उत्तर: वह महल मैना का पैतृक निवास था। उसकी बचपन की यादें उससे जुड़ी थीं। हर व्यक्ति को अपनी जन्मभूमि और घर से प्रेम होता है, इसलिए मैना उस 'जड़ पदार्थ' को अपनी भावनाओं के कारण बचाना चाहती थी।
• भस्म: जलकर राख हो जाना
• जड़ पदार्थ: निर्जीव वस्तु (Inanimate object)
• पाषाण-हृदय: पत्थर दिल/निर्दयी
• निरपराध: जिसने कोई अपराध न किया हो
• अवशिष्ट: बचा हुआ (Remains)