🕊️ साँवले सपनों की याद - कक्षा 9

जाबिर हुसैन द्वारा रचित प्रसिद्ध पक्षी-प्रेमी सालिम अली का भावपूर्ण संस्मरण

1. लेखक परिचय एवं पाठ का सार

📖 परिचय (Introduction)

'साँवले सपनों की याद' जाबिर हुसैन द्वारा जून 1987 में प्रसिद्ध पक्षी-विज्ञानी (Ornithologist) सालिम अली की मृत्यु के तुरंत बाद लिखा गया एक संस्मरण (Memoir) है। लेखक ने अपने दुख और अवसाद को इस पाठ के रूप में व्यक्त किया है।

🌟 शीर्षक का अर्थ (Meaning of Title)

'साँवले सपने' उन दुखद यादों का प्रतीक हैं जो सालिम अली के जाने के बाद शेष रह गई हैं। यह उन सुनहरे पलों की याद है जो अब लौटकर नहीं आएंगे, जैसे एक सुंदर सपना जो धुंधला (साँवला) हो गया है।

🔑 मुख्य पात्र (Key Figures)

  • सालिम अली: विश्व प्रसिद्ध पक्षी-प्रेमी (Birdwatcher)।
  • चौधरी चरण सिंह: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री।
  • डी. एच. लॉरेंस: प्रसिद्ध अंग्रेजी उपन्यासकार और प्रकृति प्रेमी।
  • फ्रीडा लॉरेंस: डी. एच. लॉरेंस की पत्नी।

2. सालिम अली: एक अंतहीन सफर

⚡ अंतिम यात्रा का वर्णन

लेखक सालिम अली की शव-यात्रा का वर्णन करते हुए कहते हैं कि यह सफर उनके पिछले तमाम सफरों से अलग है। इस बार वे भीड़-भाड़ और तनाव की जिंदगी से आखिरी बार दूर जा रहे हैं।

वे उस "वन-पक्षी" की तरह हैं जो अपना आखिरी गीत गाकर प्रकृति की गोद में जा बसा हो। अब कोई भी अपने दिल की धड़कन देकर भी उन्हें वापस नहीं लौटा सकता।

💡 बचपन की घटना (Turning Point)

सालिम अली के जीवन की दिशा एक घटना ने बदल दी थी। बचपन में उनकी एयरगन (Airgun) से एक गौरैया (Sparrow) घायल होकर गिर पड़ी थी। उस घायल पक्षी की देखभाल और जिज्ञासा ने उन्हें पक्षी-प्रेमी बना दिया और वे पूरी जिंदगी पक्षियों की खोज में लगे रहे।

3. महत्वपूर्ण घटनाएँ और संस्मरण

3.1 साइलेंट वैली का किस्सा

केरल की 'साइलेंट वैली' को रेगिस्तानी हवाओं के प्रकोप से बचाने के लिए सालिम अली तत्कालीन प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह से मिले थे। चौधरी साहब गाँव की मिट्टी से जुड़े नेता थे। सालिम अली द्वारा पर्यावरण के खतरों का चित्र खींचने पर प्रधानमंत्री की आँखें नम हो गई थीं।

3.2 डी. एच. लॉरेंस का प्रसंग

⚡ "मेरी छत पर बैठने वाली गौरैया..."

अंग्रेजी उपन्यासकार डी. एच. लॉरेंस की मृत्यु के बाद जब उनकी पत्नी फ्रीडा लॉरेंस से अपने पति के बारे में कुछ लिखने को कहा गया, तो उन्होंने कहा:
"मेरे पति के बारे में मुझसे ज़्यादा मेरी छत पर बैठने वाली गौरैया जानती है।"

यह दर्शाता है कि लॉरेंस प्रकृति और पक्षियों के कितने करीब थे, और सालिम अली भी उन्हीं की तरह प्रकृति-प्रेमी थे।

4. सालिम अली का व्यक्तित्व

विशेषता विवरण
प्रकृति प्रेम वे प्रकृति को अपनी नहीं, बल्कि प्रकृति की ही नज़र से देखते थे।
यायावर (Wanderer) गले में दूरबीन लटकाए, वे हमेशा नए पक्षियों की खोज में दुर्गम स्थानों पर जाते थे।
समर्पण लंबी यात्राओं ने उनके शरीर को कमजोर कर दिया था, पर उनकी आँखों की रोशनी पक्षियों को खोजने के लिए हमेशा समर्पित रही।
सादगी वे अत्यंत सरल और सहज स्वभाव के व्यक्ति थे।

5. पाठ का निष्कर्ष

🌟 टापू नहीं, सागर

लेखक कहते हैं कि सालिम अली केवल एक 'टापू' (Island - सीमित क्षेत्र) बनकर नहीं रहे, बल्कि वे एक 'अथाह सागर' (Ocean - विस्तृत और गहरा) बनकर उभरे। उनका अनुभव और योगदान विशाल था।

🔑 वृन्दावन का उदाहरण

  • लेखक याद दिलाते हैं कि जैसे वृन्दावन में कृष्ण की बांसुरी का जादू कभी खत्म नहीं होता।
  • वैसे ही सालिम अली भले ही अब नहीं हैं, लेकिन पक्षियों की दुनिया में उनकी खोज और यादें हमेशा जीवित रहेंगी।
  • जब तक पक्षी चहचहाएंगे, सालिम अली हमारे बीच महसूस होंगे।

📝 कठिन शब्दार्थ (Glossary)

गढना: बनाना/रचना
हुजूम: भीड़
सैलानी: यात्री/पर्यटक
सोता: स्रोत/झरना
हरारत: उष्णता/गर्मी

6. अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)

💡 प्रश्न 1

प्रश्न: किस घटना ने सालिम अली के जीवन की दिशा को बदल दिया?

उत्तर: बचपन में सालिम अली की एयरगन से एक नीले कंठ वाली गौरैया घायल होकर गिर पड़ी थी। उसकी देखभाल करते हुए उनके मन में पक्षियों के प्रति दया और जिज्ञासा जागी, जिसने उन्हें विश्व प्रसिद्ध पक्षी-विज्ञानी बना दिया।

💡 प्रश्न 2

प्रश्न: 'सालिम अली प्रकृति की दुनिया में एक टापू बनने की बजाय अथाह सागर बनकर उभरे थे।' - आशय स्पष्ट करें।

उत्तर: 'टापू' एक सीमित स्थान होता है, जबकि 'सागर' विशाल और गहरा होता है। सालिम अली का कार्यक्षेत्र और ज्ञान किसी सीमा में नहीं बंधा था। उनका योगदान अत्यंत व्यापक और गहरा था, इसलिए उनकी तुलना सागर से की गई है।